Saturday, 23 January 2016

बुलेट ट्रेन की प्रासंगिकता

इन दिनों जापान के सहयोग से मुम्बई और अहमदाबाद के मध्य प्रस्तावित बुलेट ट्रेन चर्चा में है। ऐसा माना जा रहा है की लगभग 98000 करोड़ की लागत का यह प्रोजेक्ट भारत की अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा देगा। परंतु ज़रा व्यवहारिक ढंग से देखा जाए तो भारतीय रेलवे की प्राथमिकताओं में बुलेट ट्रेन से पहले यात्रियों की सुरक्षा, स्वच्छ्ता, आधुनिकीकरण और दक्षता होना चाहिए।

हर साल मानवरहित रेलवे क्रासिंग पर होने वाली दुर्घटनाओ में हज़ारो लोग अपनी जान  गंवाते हैं। जनरल कोच में यात्री भेड़ बकरियो की तरह भरे होते हैं।  यहाँ ट्रेनों का समय पर आना ही ब्रेकिंग न्यूज़ बन जाता है। ट्रेन में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता और साफ़ सफाई पर तो जितना लिखा जाए कम ही है। क्या ऐसे में भारी लागत में बुलेट ट्रेन चलने के बजाय इन बुनियादी सुविधाओ को सुदृण बनाने पर रकम खर्च नहीं होनी चाहिए?

और फिर जिस जोर शोर से महिमामंडन इस बुलेट ट्रेन का किया जा रहा है आखिर यह किसके लिए चलायी जा रही है। यह ठीक है कि बुलेट ट्रेन से मुम्बई अहमदाबाद की 8 घंटे की दूरी 2 घंटे में तय हो जायेगी पर यह तो अभी भी  हवाई यात्रा से डेढ़ घंटे में तय हो जाती है फिर भला उच्च आय वर्ग के यात्री जिनके लिए प्रथमकिता समय है पैसा नहीं, वे भला बुलेट ट्रेन में क्यों बैठेंगे जब उतने ही पैसे में वो हवाई यात्रा कर सकते हैं। रही बात निम्न एवं मध्य आय वर्ग की तो वे क्या वे 500 किमी की यात्रा पर 2800 रूपए खर्च करेंगे?

इस प्रकार यह स्पष्ट है की बुलेट ट्रेन न तो रेलवे की बुनियादी समस्याओं को हल कर सकती है और न ही यह वित्तीय मापदंडों पर व्यवहारिक है। वास्तव में यह एक विशिष्ट आय वर्ग को यातायात का एक अतिरिक्त विकल्प मात्र प्रदान करती है जिसका रेल में सफ़र करने वाली 90% जनता के लिए कोई महत्त्व नहीं है।
जनसत्ता 20 जनवरी 2016 में भी प्रकाशित।

http://epaper.jansatta.com/m/697754/Jansatta.com/Jansatta-Hindi-20012016#issue/6/1


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